नई दिल्ली: ईमानदारी को दुनिया सलाम करती है,ऐसी ही अनोखी ईमानदारी की मिसाल महाराष्ट्र के औरंगाबाद में देखने को मिली जहां केन्या का एक आदमी सिर्फ 200 रुपये का अपना उधार चुकाने के लिये भारत आया है ,महज 200 रुपए की उधारी चुकाने के लिए अपने परिवार के साथ लाखों रुपए खर्च कर औरंगाबाद के एक व्यक्ति के यहां आया।
पैसा वापस करते ही केन्या का परिवार भावुक हो गया. उसने भारतीय दोस्त को 30 साल पहले मदद करने के लिए गले से लगा लिया. खास बात यह है कि केन्या निवासी जब 30 साल बाद 200 रुपए लौटाने के लिए औरंगाबाद वापस तो वह एक सांसद बन चुका था।
केन्या से आए इस व्यक्ति का नाम रिचर्ड टोंगी है. रिचर्ड टोंगी साल 1985 में औरंगाबाद में मैनेजमेंट की पढ़ाई करने आया था. यहां के मौलाना आजाद कॉलेज में उसने पढ़ाई की थी. इस दौरान वह चार साल औरंगाबाद में रहा था. रिचर्ड टोंगी ने बताया कि कॉलेज के पास ही काशीनाथ गवली की किराना दुकान थी।
Maharashtra: Richard Nyagaka Tongi, a Kenyan Member of Parliament from the Nyaribari Chache constituency returned to Aurangabad, where he had studied management at a local college, to pay a debt of ₹ 200 that he had taken 22 years ago. (11.7.19) pic.twitter.com/OdwQjSkLYJ
— ANI (@ANI) July 11, 2019
तब रिचर्ड इसी दुकान से अपनी जरूरत का सामान खरीदा करता था. कई बार उनके पास पैसे नहीं होते थे. ऐसे में काशीनाथ गवली उसे उधार दे दिया करते थे. ऐसे में दोनों के बीच विश्वास का रिश्ता बन गया. जब पैसे आते तो रिचर्ड काशीनाथ को दे देते थे. जब पैसा नहीं होता तो काशीनाथ की दुकान से उधार पर सामान ले जाते थे।

पढ़ाई पूरी करने बाद रिचर्ड केन्या वापस चले गए. वहां जाकर वो राजनीति में सक्रिय हो गए. सांसद भी बने और केन्या के विदेश मंत्रालय के उपाध्यक्ष भी. अपने इस 30 साल के सफर में उन्हें कई बार भारत आकर काशीनाथ से मिलने की इच्छा हुई, क्योंकि रिचर्ड को इनके 200 रुपये लौटाने थे. लेकिन हर बार मौका नहीं मिल पाता था. जब वे इस बार केन्या के मंत्रीगण के साथ भारत आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले. दिल्ली में अपना काम करने के बाद वह अपनी पत्नी मिशेल के साथ औरंगाबाद के लिए रवाना हो गए।

औरंगाबाद पहुंचने के बाद रिचर्ड ने काशीनाथ गवली और उनकी दुकान की तलाश शुरू की. 30 साल बाद औरंगाबाद शहर उनके लिए काफी नया लग रहा था. सबकुछ बदल गया था. इसके बाद भी रिचर्ड ने काशीनाथ को ढूंढ निकाला. हालांकि, मिलने के बाद थोड़ी देर तक काशीनाथ रिचर्ड को नहीं पहचान पाए. लेकिन रिचर्ड ने उन्हें याद दिलाया तो वे पहचान गए. काशीनाथ के 200 रुपये के बदले रिचर्ड ने उन्हें 19 हजार रुपये वापस किए. काशीनाथ पैसा नहीं ले रहे थे. लेकिन रिचर्ड ने कहा यह सिर्फ पैसे की बात नहीं है।
वहीं, काशीनाथ गवली का कहना है कि मैं तो भूल गया था. 30 साल बाद कौन याद रखता है. वह मुझे ढूंढते हुए यहां तक आए. शुरू में मैंने पहचाना भी नहीं पा रहा था, लेकिन उसने सभी बातें बता दी तो याद ताजी हो गई।