
इस्लामी गणतंत्र ईरान और क़तर फ़ार्स की खाड़ी के रणनैतिक क्षेत्र में दो पड़ोसी देशों के रूप में द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार के मार्ग में क़दम बढ़ा रहे हैं जिससे फ़ार्स की खाड़ी की स्थिरता व सुरक्षा के उद्देश्य से क्षेत्रीय सहयोग के महत्व का पता चलता है।
पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, ईरान, क़तर, ओमान और कुवैत समेत फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देश, क्षेत्रीय सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में अपने व्यापक सहयोग के माध्यम से फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र की सुरक्षा व स्थिरता की रक्षा में अत्यंत सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।
इस बीच इस्लामी गणतंत्र ईरान, फ़ार्स की खाड़ी के साथ ही हुर्मुज़ स्ट्रेट और ओमान सागर में सुरक्षा स्थापित करने में प्रभावी भूमिका निभा रहा है और उसने एक ज़िम्मेदार और क़ानून का पालन करने वाले देश के रूप में हुर्मुज़ स्ट्रेट से संसार तक ऊर्जा के स्थानांतरण को सुनिश्चित बनाया है।
फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों के साथ निरंतर परामर्श के कारण इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की सुरक्षा अधिक बढ़ सकती है लेकिन अगर अमरीका ने समुद्री सुरक्षा के बहाने फ़ार्स की खाड़ी में अपनी उपस्थिति को स्थायी बना दिया तो इसका एकमात्र परिणाम अशांति बढ़ना है।
इसी परिप्रेक्ष्य में इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाॅक्टर हसन रूहानी ने क़तर नरेश शैख़ तमीम बिन हमद आले सानी से टेलीफ़ोन पर बात करते हुए कहा कि फ़ार्स की खाड़ी में अमरीका समेत क्षेत्र से बाहर की कुछ शक्तियों की कार्यवाहियों का लक्ष्य, संसार को यह बताना है कि यह क्षेत्र अशांत है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यवाहियां, क्षेत्र की समस्याओं को अधिक जटिल व ख़तरनाक बना देंगी। इन परिस्थितियों में फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र में शांति, व्यवस्था और सुरक्षा को बिगड़ने से रोकने के लिए इस क्षेत्र के तटवर्ती देशों के बीच परामर्श पहले से अधिक ज़रूरी हो गया है।
ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ की क़तर यात्रा और अपने क़तरी समकक्ष मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी से उनकी मुलाक़ात के बाद दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की टेलीफ़ोनी वार्ता, इस क्षेत्र की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तटवर्ती देशों के निरंतर परामर्श के महत्व को उजागर करती है।
इसी परिप्रेक्ष्य में क़तर नरेश शैख़ तमीम बिन हमद आले सानी ने ईरान के राष्ट्रपति डाॅक्टर हसन रूहानी से टेलीफ़ोन पर बात करते हुए कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा, फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों के माध्यम से ही सुनिश्चित बनाई जानी चाहिए और इस संबंध में क़तर का रुख़ पूरी तरह से स्पष्ट है। और वह द्विपक्षीय संबंधों व क्षेत्रीय सुरक्षा को मज़बूत बनाने के लिए ईरान के साथ सहयोग का इच्छुक है।
बहरहाल, फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग और परामर्श जितना अधिक होगा, उतना ही इस क्षेत्र की सुरक्षा व स्थिरता सुदृढ़ होगी और यहां अमरीका समेत क्षेत्र से बाहर के देशों के हस्तक्षेप और सैन्य उपस्थिति का बहाना समाप्त होता जाएगा।
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