
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में 35 दिन से नजरबंद माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी को ह्रदय संबंधी बीमारी के इलाज के लिए सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित एम्स में भर्ती कराया गया।
उन्हें एम्स में भर्ती करने का आदेश उच्चतम न्यायालय ने दिया था। जम्मू-कश्मीर के 72 साल के पूर्व विधायक को श्रीनगर से पुलिस सुरक्षा में प्रमुख चिकित्सकीय संस्थान एम्स में लाया गया, जहां वह दिल्ली और जम्मू-कश्मीर पुलिस के कर्मियों की हिरासत में रहेंगे। माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य तारिगामी को ह्रदय संबंधी बीमारी है।
उन्होंने माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी को पिछले हफ्ते सीने में दर्द के बारे में बताया था। येचुरी और तारिगामी की यह मुलाकात उच्चतम न्यायालय के आदेश पर हुई थी। शीर्ष अदालत ने मुलाकात के बाद येचुरी को एक हलफनामा दायर करने को कहा था।
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तारिगामी को ‘‘जल्द से जल्द’’ श्रीनगर से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराने का आदेश दिया था। केंद्र की ओर से जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को पांच अगस्त को खत्म करने के बाद से ही तारिगामी श्रीनगर में नजरबंद थे।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस ए नजीर की पीठ ने कहा था कि श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसकेआईएमएस) और एम्स के डॉक्टरों के बीच सलाह-मशविरे के बाद तारिगामी को स्थानांतरित किया जाएगा।
पीठ ने कहा था कि येचुरी ने अदालत के 28 अगस्त के आदेश की तामील करते हुए जो हलफनामा दायर किया है उसे देखने के बाद हम यह मानते हैं कि मोहम्मद यूसुफ तारिगामी को तुरंत नई दिल्ली के एम्स में भर्ती कराने के लिए कदम उठाने चाहिए।
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