नेतन्याहू को बचाने के लिए फलस्तीन पर बड़ा हमला करना चाहता है इज़रायल!

नेतन्याहू को बचाने के लिए फलस्तीन पर बड़ा हमला करना चाहता है इज़रायल!

इस्राईल के ऊर्जा मंत्री ने मंत्रीमंडल की बैठक के बाद कहा है कि ग़ज़्ज़ा पट्टी पर व्यापक सैन्य हमले की संभावना है।

पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, युवाल स्टीनिट्ज़ ने रेडियो इस्राईल से बात करते हुए कहा कि इस्राईल को ग़ज़्ज़ा पट्टी पर व्यापक सैन्य हमला कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमास से समझौते के लिए यह हमला बहुत ज़रूरी है।

इस्राईल के ऊर्जा मंत्री का यह बयान ऐसी स्थिति में सामने आया है जब ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू मंत्रीमंडल का गठन करने में विफल रहे हैं और आर्थिक भ्रष्टाचार के मामले में उन पर कई मुक़द्दमे चल रहे हैं और अदालत जल्द ही इस मामले में फ़ैसला सुनाने वाली है।

इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि आर्थिक भ्रष्टाचार के किसी न किसी मामले में उन्हें ज़रूर सज़ा सुनाई जाएगी और इसी लिए इस बात की आशंका है कि वे सैन्य हमले के विकल्प पर अमल कर सकते हैं। संभव है कि इस्राईल के ऊर्जा मंत्री ने ग़ज़्ज़ा पट्टी पर हमले की जो बात कही है, वह इसी परिप्रेक्ष्य में हो।

दूसरी ओर चूंकि ब्ल्यू एंड वाइट पार्टी के प्रमुख बेनी गेनेट्स अब तक मंत्री मंडल के गठन में सफल नहीं हो सके हैं तो शायद ग़ज़्ज़ा पट्टी पर हमले की धमकी, अगले चुनाव में लिकुड पार्टी की स्थिति बेहतर बनाने और ग़ज़्ज़ा पट्टी से सटे क्षेत्रों में बनी ज़ायोनी काॅलोनियों में रहने वालों के अधिक से अधिक वोट हासिल करने के लिए दी जा रही है।

यह विकल्प इस दृष्टि से भी ध्यान योग्य है कि गेनेट्स ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि उनकी एक बड़ी प्राथमिकता उन ख़तरों को दूर करना भै जो इस्राईल के दक्षिणी क्षेत्रों में रहने वालों के सामने हैं।

उन्होंने कहा कि दक्षिणी इस्राईल में रहने वालों के सामने जो ख़तरे हैं उनके संबंध में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं की जाएगी और हर क़ीमत पर हम अपनी प्रतिरोधक शक्ति को बहाल करेंगे चाहे इसके लिए हमें उन लोगों को सीधे सीधे निशाना ही क्यों न बनाना पड़े जो तनाव बढ़ाने के ज़िम्मेदार हैं।

बेनी गेनेट्स कई हफ़्ते से मंत्री मंडल के गठन के उद्देश्य से समझौते तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन लगता है अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में राजनैतिक संकट जारी ही रहेगा और अगर गेनेट्स मंत्री मंडल नहीं बना पाते हैं तो इस्राईल में कुछ ही महीनों के दौरान तीसरी बार संसदीय चुनाव होंगे।

गेनेट्स के पास अपने घटकों को मिला कर 57 सीटें हैं जबकि सरकार गठन के लिए 61 सीटें ज़रूरी हैं। इस स्थिति में उन्हें या तो लिकुड पार्टी के कुछ सांसदों को अपने साथ मिलाना होगा या फिर लेबरमैन की पार्टी से हाथ मिलाना होगा जो टीकाकारों की दृष्टि में लगभग असंभव है।

इस बीच अगर गेनेट्स सरकार बनाने में सफल हो जाते हैं और उनके मंत्री मंडल में अरब सांसद भी शामिल होते हैं तो इस स्थिति में उन पर अतिवादी ज़ायोनियों की ओर से दबाव बढ़ जाएगा जिसके नतीजे में उनके मंत्री मंडल की उम्र बहुत कम होगी।

अगर अरब सांसदों की अनदेखी की जाती है वे गठजोड़ से निकल जाएंगे और इस्राईल में फिर राजनैतिक संकट खड़ा हो जाएगा। इन परिस्थितियों में इस बात की संभावना है कि ज़ायोनी शासन बंद गली से निकलने के लिए संसद को भंग कर दे और तीसरी बार मध्यावधि चुनाव कराए जाएं लेकिन उसमें भी यह निश्चित नहीं है कि इस राजनैतिक बंद गली में कोई दरवाज़ा खुल ही जाएगा।

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