
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश के विभाजन के वक्त भारत के साथ रहने वाले रजवाड़ों के ‘राजा’ द्वारा घोषित निजी संपत्तियों के हकदार सिर्फ उसकी ‘गद्दी’ संभालने वाले ही नहीं, बल्कि उसके तमाम वारिस हैं। कोर्ट ने कहा कि यह ऐसी ’गद्दी’ है जिसका न कोई साम्राज्य है और न प्रजा।
ऐसे रजवाड़ों के राजाओं की निजी संपत्तियों का बंटवारा उस पर लागू कानून या पर्सनल लॉ के तहत होगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की संपत्ति का बंटवारा शरीअत (मुस्लिम पर्सनल लॉ) के आधार पर करने का फैसला सुनाया।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि भारत में विलय के बाद रजवाड़ों के शासक राजा नहीं रहे।
इनकी संप्रभुता और सर्वोच्चता नहीं रही। निजी संपत्तियों के अलावा उनकी कोई भूमि नहीं। वे सिर्फ नाम के राजा हैं। दरअसल नवाब रजा अली खां की संपत्ति को लेकर 52 साल से विवाद चल रहा है।
अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, नवाब ने भारत में विलय के बाद अपने हिस्से की पांच संपत्तियां छोड़ी थीं। उनके निधन के बाद उनके बड़े पुत्र मुर्तजा खां ने संपत्तियों पर दावा पेश कर कब्जा कर लिया।
विवाद निचली अदालतों से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अंतिम शासक के दोनों बेटे और उनके वारिस संपत्ति के हकदार होंगे।
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