दिल्ली हिंसा पर विदेशी मीडिया की कड़ी टिप्पणी, कहा- जल रही थी दिल्ली और ट्रंप को पार्टी दे रहे थे मोदी

देश की राजधानी दिल्ली में बीते तीन दिन काफी भयानक रहे। लगातार तीन दिनों से हिंसा जारी रही और लोगों की जान जाती रही, दुकानें जलती रहीं और घरों को लूटा जाता रहा, लेकिन न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से कुछ कहा गया और ना ही गृहमंत्री अमित शाह की ओर से कोई बड़ी पहल दिखी। लगातार केंद्र सरकार और उसके मांतहत आने वाली दिल्ली पुलिस सवालों के घेरे में है।

लेकिन सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह कि यह सब कुछ भारत दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दिल्ली में रहने के दौरान ही होता रहा और पीएम मोदी या गृहमंत्री की तरफ से इस पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। सबके मन में ये सवाल आता रहा कि आखिर दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति के दौरे के दौरान राजधानी में जो हिंसा का खेल चलता रहा, उस पर दुनिया में भारत को लेकर क्या छवि जाएगी।

और ऐसा ही हुआ भी। विदेशी मीडिया ने ट्रंप के दौरे के दौरान दिल्ली में होती रही हिंसा को लेकर सख्त टिप्पणी की है। विदेशी मीडिया ने दिल्ली हिंसा पर दोनों नेताओं के अप्रभावित रहने को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि भारत की राजधानी में हो रही हिंसा से न तो प्रधानमंत्री मोदी और न ही ट्रंप प्रभावित दिखे। दोनों दिल्ली हिंसा के दौरान भी भारत में घूमने और बैठकों में व्यस्त रहे।

वहीं, एक अन्य अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने दिल्ली हिंसा की तरफ इशारा करते हुए लिखा कि ट्रंप ऐसे किसी मामले पर टिप्पणी में नहीं उलझे, जिसे पीएम मोदी की बुराई के तौर पर देखा जा सके। वहीं, इस मामले में सबसे कठोर टिप्पणी अमेरिकी न्यूज वेबसाइट वाइस ने की है। एक लेख में वाइस ने कहा कि- ‘दिल्ली जल रही थी और ट्रंप के दौरे पर पीएम मोदी पार्टी दे रहे। इतना ही नहीं, वाइस ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए ये भी कहा कि उन्होंने दिल्ली में जारी हिंसा और संशोधित नागरिकता कानून पर भारत में जारी घमासान पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

‘नई दिल्ली की गलियां हिंदू-मुस्लिम के बीच संघर्ष क्षेत्र में बदलीं’ शीर्षक से न्यूयॉर्क टाइम्स में दिल्ली हिंसा पर छपे एक लेख में कहा गया कि “पीएम मोदी की हिंदू फर्स्ट नीति के चलते राजधानी में हालात दंगे जैसे हो गए।” एक दूसरे लेख में कहा गया, “एक तरफ जहां हैदराबाद हाउस के हरे-भरे गार्डन में राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी दोस्ती का जश्न मनाया और विभिन्नता और एकता वाले आधुनिक भारत की बात की, वहीं दूसरी तरफ वहां मोदी की बांटने वाली नीतियों के कारण धार्मिक संघर्ष चल रहा था, जिसमें लाशों की झड़ी लग गई।” लेख में यहां तक कहा गया कि “ट्रंप के ठहरने की जगह से कुछ ही दूर पर उन्मादी हिंदुओं की भीड़ लोहे के रॉड लिए सड़कों पर अपने मुस्लिम पड़ोसियों का शिकार कर रही थी।”

वहीं अमेरिका के अलावा ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में छपी खबर में कहा गया कि “ट्रंप का भारत दौरा तीव्र प्रदर्शनों की वजह से कमजोर पड़ा”। वहीं, जर्मनी के अखबार डर स्पीगल में ट्रंप के दौरे को लेकर कहा गया कि “बाहर दिखावा चलता रहा, अंदर प्रदर्शन।” उधर फ्रांस की न्यूज एजेंसी एजेंसी फ्रांस प्रेस (एएफपी) ने भी सख्त टिप्पणी में कहा, “भारत की मोदी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लिए रेड कार्पेट बिछाकर काफी दिखावे वाली चीजें पेश कीं, लेकिन दिल्ली में हुई हिंसा ने उस धार्मिक तनाव को सामने ला दिया, जिसे बढ़ावा देने का आरोप ट्रंप के दोस्त (मोदी) पर लगता है।”

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