जामिया की छात्रा रोते हुए बोली-मैं मुस्लिम नहीं हूँ फिर भी लड़ रही हूं, वीडियो हुआ वायरल

जामिया की छात्रा रोते हुए बोली-मैं मुस्लिम नहीं हूँ फिर भी लड़ रही हूं, वीडियो हुआ वायरल

नागरिकता संशोधन बिल पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जबरदस्‍त विरोध प्रदर्शन चल रहा है। मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि रविवार शाम दिल्ली के जामिया नगर से लगे सराय जुलैना के पास डीटीसी की तीन बसों को आग के हवाले कर दिया गया। जामिया के छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने यूनिवर्सिटी में घुसकर उनसे मारपीट की है।

पुलिस ने जब कुछ छात्रों को हिरासत में लिया तो प्रदर्शन और हिंसक हो गया। छात्र देर रात तक दिल्ली पुलिस के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे और फिर हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ। इस पूरे मामले को लेकर झारखंड के रांची की रहने वाली एक छात्रा मीडिया के सामने आई है और उसने आपबीती सुनाई है। उसने ये भी बताया है कि रविवार को क्‍या-क्‍या हुआ।

छात्रा ने कहा, ‘जब ये सब शुरू हुआ तो हम लाइब्रेरी में थे। हमें सुपरवाइजर की ओर से एक कॉल आया कि सब खराब होता जा रहा है। मैं जाने ही वाली थी कि तभी छात्रों का एक झुंड भागते हुए आया और 30 मिनट में लाइब्रेरी छात्रों से भर गई। मैंने देखा कि कुछ लड़कों के सिर से खून निकल रहा है। कुछ पुलिस वाले अंदर आए और जोर-जोर से गालियां देने लगे। उन्होंने सभी को बाहर जाने के लिए बोला। मैं अपने हॉस्टल की बिल्डिंग की ओर आगे बढ़ने लगी। मैंने देखा कि लड़के सड़क पर गिरे पड़े हैं। वो बेहोश थे।

छात्रा ने आगे कहा, ‘जब हम लोग जा रहे थे तो हमारे हाथ ऊपर थे। आखिरकार मैं हॉस्टल पहुंच गई। थोड़ी देर बाद कुछ लड़के हमारे हॉस्टल में भागते हुए आए और कहा कि लड़कियों को पीटने के लिए महिला पुलिसकर्मी यहां आ रही हैं। मैं उनसे बचने के लिए दूसरी जगह चली गई। कुछ देर बाद मैं हॉस्टल में लौटी। मैंने देखा कि लड़कों के कपड़े खून से सने हैं।’ छात्रा ने रोते हुए कहा, ‘हमें लगता था कि छात्रों के लिए दिल्ली सबसे सुरक्षित है और ये एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। मुझे लगता था कि हमारे लिए यूनिवर्सिटी सबसे महफूज है, हमें कभी कुछ नहीं होगा। हम पूरी रात रोते रहे। ये क्या हो रहा है। अब मुझे इस पूरे देश में सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है

छात्रा ने कहा मुझे नहीं पता कि हम लोग कहां जाएंगे और कब हम भीड़ का शिकार हो जाएंगे। मैं मुस्लिम नहीं हूं फिर भी मैं पहले दिन से आगे खड़ी हूं, तो मैं क्यों लड़ रही हूं। हमारी पढ़ाई का क्या फायदा है अगर हम सही के साथ खड़े नहीं हो सकते।’

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