
गुजरात हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा एक शख्स को कथित गौ-हत्या के लिए दी गई 10 साल की सज़ा पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि सलीम नाम का यह शख्स गौ-वध से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में लिप्त नहीं था। गौरतलब है, गुजरात के नए संशोधित पशु संरक्षण कानून के तहत सज़ा पाने वाला यह पहला शख्स था। इस संबंध में इसी साल जनवरी में सत्तार कोलिया की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें उसने सलीम पर बछड़ा चुराने और उसे मारकर अपनी बेटी के शादी समारोह में परोसने का आरोप लगाया था।
सलीम को दोषी ठहराये जाने और सजा सुनाने से पहले नव संशोधित अधिनियम के तहत गवाहों की गवाही और फोरेंसिक रिपोर्ट पर विचार किया गया। अधिकारियों ने कहा कि नव संशोधित अधिनियम के तहत यह पहली सजा हो सकती है। अधिनियम में गोमांस के परिवहन, बिक्री और रख-रखाव के लिये सात से 10 साल कारावास की सजा का प्रावधान है। पहले ऐसे मामलों में अधिकतम तीन साल कारावास की सजा का प्रावधान था। संशोधित अधिनियम के अनुसार गोमांस के परिवहन के लिये इस्तेमाल किये जाने वाले वाहनों को स्थायी रूप से जब्त किया जा सकता है।
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