कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- बगैर जातिवाद राजनीति..?

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- बगैर जातिवाद राजनीति..?

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बोल एक बार फिर बिगड़ गए। संभागीय बैठक में वे बोल पड़े कि जातिवाद के बगैर राजनीति नहीं हो सकती।

क्षेत्र के बड़े समाज पर ध्यान देना पड़ेगा। वहीं इशारा-इशारों में उन्होंने झाबुआ चुनाव में मिली करारी हार पर वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे पर भी कटाक्ष कर दिया।

हार के बाद मंथन
संगठनात्मक चुनाव में उम्र के बंधन को लेकर कल दीनदयाल भवन में संभागीय बैठक बुलाई गई थी। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय, संगठन महामंत्री सुहास भगत सहित कई नेता मौजूद थे।

चर्चा के दौरान भगत ने साफ कर दिया कि मंडल अध्यक्ष 40 साल से ज्यादा उम्र का नहीं होगा तो जिला अध्यक्ष की उम्र ज्यादा से ज्यादा 50 हो सकती है।

ये फैसला शीर्ष नेतृत्व का है, जिसका पालन सभी को सख्ती से करना है। उनकी बात खत्म होने के बाद विजयवर्गीय ने माइक संभाला। जब वे नेताओं का अभिवादन कर रहे थे, तब मोघे की बारी आने पर उन्होंने कहा कि हमारे बीच वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे भी हैं, जो पता नहीं कहां-कहां की जिम्मेदारियां उठा लेते हैं। ये सुनकर सभी सन्न रह गए। बाद में विजयवर्गीय ने दो नंबरी चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।

कहना था कि मेरे विधायक बनने से पहले दो नंबर क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था। बाद में मैंने इतनी मेहनत की कि उसे अपनी पार्टी का गढ़ बना दिया। अब तो किसी को भी खड़ा कर दो, वहां से वो आसानी से जीत जाएगा। ये बोलते ही उन्होंने पूछा कहां है रमेश (विधायक रमेश मेंदोला)?

चर्चा में उनका कहना था कि बिना जातिवाद के राजनीति नहीं हो सकती। दो नंबर विधानसभा में अहिरवार और बैरवा समाज बड़ी संख्या में था। हमें पहले वोट नहीं मिलते थे।

बाद में हमने उन्हें जोडऩा शुरू किया। मेरा तो यहां तक मत है कि जिस मंडल में जिस समाज की संख्या ज्यादा है, वहां का मंडल अध्यक्ष उसी से लिया जाना चाहिए। बिना जातिवाद के राजनीति नहीं हो सकती।

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