
असम के डिटेंशन सेंटर में बंद एक अवैध शरणार्थी की शुक्रवार को बीमारी के कारण मौत हो गई।
न्यूज़ बाईटस ऐप डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, शख्स को बीमारी के चलते 10 दिन पहले गोलपाड़ा के गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इस मौत के साथ डिटेंशन सेंटर में बंद लोगों की मौत की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। राज्यभर के डिटेंशन सेंटर्स में लगभग 1,000 अवैध शरणार्थी बंद है।
अवैध अप्रवासियों को रखने के लिए बनाए गए डिटेंशन सेंटर में उन लोगों को रखा जाता है जिन्हें अदालतें विदेशी घोषित कर देती हैं। बता दें कि असम में फिलहाल छह अस्थायी डिटेंशन सेंटर चल रहे हैं।
अक्टूबर 2019 में एक और शख्स की हुई थी मौत
इससे पहले अक्टूबर में भी इसी अस्पताल में बंद एक और 65 वर्षीय शख्स दुलाल पॉल की मौत हुई थी। दुलाल के परिवार का दावा था कि वह वो मानसिक रूप से परेशान थे और उन्हें डिटेंशन सेंटर में बंद कर दिया गया।
सोनितपुर जिले के रहने वाले पॉल अक्टूबर, 2017 से डिटेंशन सेंटर में बंद थे। बीमारी के चलते उन्हें पिछले साल सितंबर में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
डिटेंशन सेंटर में अब तक बंद 29 की मौत
देशभर में नागरिकता कानून और प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) को लेकर डिटेंशन सेंटर फिर से चर्चा में है। बीते दिसंबर में खत्म हुए संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने जानकारी दी थी कि असम के डिटेंशन सेंटर में कुल 988 लोग बंद हैं।
सरकार ने बताया था कि 2016 से लेकर 13 अक्टूबर, 2019 तक हिरासत में बंद 28 लोगों की डिटेंशन सेंटरों या अस्पतालों में मौत हुई। अब यह संख्या बढ़कर 29 हो गई है।
असम देश का एकमात्र राज्य है, जहां अभी तक NRC लागू हुई है और यहीं पर सबसे ज्यादा डिटेंशन सेंटर बने हैं। यहां पर जो लोग NRC से बाहर रहेंगे, उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजा जाएगा।
NRC की अंतिम सूची से लगभग 19 लाख लोग बाहर रहे थे। अब इनके पास अदालतों में जाने का विकल्प बचा है। अगर ये लोग अदालतों में अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए तो सरकार इन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजेगी।
केंद्र सरकार ने कई मौकों पर कहा है कि वह देशभर में NRC लागू करेगी। इसके तहत लोगों से उनकी नागरिकता का प्रमाण मांगा जाएगा। जो लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे, उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजने की बात कही जा रही है।
हालांकि, अभी तक देशव्यापी NRC को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार में NRC शब्द पर चर्चा भी नहीं हुई।
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