
तालिबान ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर भविष्य में शांति वार्ता फिर से शुरू करना चाहते हैं तो उनके दरवाजे खुले हैं। यह बयान आतंकवादी समूह द्वारा दो हमलों के दावे के घंटे भर बाद आया है। इन हमलों में अफगानिस्तान के 48 लोग मारे गए थे।
वॉशिंगटन व तालिबान के बीच शांति वातार् बीते सप्ताह विफल हो गई थी। इसमें हजारों अमेरिकी जवानों की वापसी के एक समझौते पर पहुंचना था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक हमले में अमेरिकी सैनिक के मारे जाने का हवाला दिए जाने के बाद वार्ता विफल हुई थी। सैनिक की मौत वार्ता से हटने का कारण रही। इस वार्ता में अफगान सरकार शामिल नहीं थी।
तालिबान के मुख्य वार्ताकार शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई ने बीबीसी से कहा कि बातचीत अफगानिस्तान में शांति का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने बातचीत के दौरान लड़ाई जारी रखकर ‘कुछ भी गलत’ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों ने भी चर्चा के दौरान हजारों तालिबानों के मारने की बात स्वीकार की है।
उन्होंने कहा, “उनके अनुसार उन्होंने हजारों तालिबानों की हत्या की है। लेकिन इस बीच अगर एक (अमेरिकी) सैनिक मारा गया तो इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें प्रतिक्रिया दिखानी चाहिए, क्योंकि दोनों तरफ से कोई संघर्षविराम नहीं था।”
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