
नई दिल्ली : पिछले हफ़्ते आरटीआई संशोधन बिल पास हुआ था और अब तीन तलाक बिल भी 99-84 वोट से पास हो गया है। तीन तलाक बिल मामले में एनडीए को संख्या बल का अहसास उसी वक़्त हो गया था जब एआईएडीएमके और जदयू वॉकआउट कर गई. हालांकि जदयू इस बिल के विरोध में थी. उस हिसाब से इसे विरोध में मतदान करना चाहिए लेकिन हुआ ऐसा नहीं चूंकि इसकी मंशा सरकार को लाभ पहुंचनी थी! इससे पहले आरटीआई संशोधन बिल में एआईएडीएमके और वाईएसआर कांग्रेस ने सरकार के पक्ष में मतदान किया था और तीन तलाक़ में इन्होंने सदन का वॉकआउट कर सरकार की मदद की.
विपक्षी नेताओं के अनुसार बीएसपी के सभी चार सांसद, समाजवादी पार्टी के सभी सात सांसद, एनसीपी और टीडीपी के दो-दो सांसद भी तीन तलाक़ पर राज्यसभा में मतदान के दौरान ग़ायब रहे. पीडीपी के भी दो सांसद मतदान से अलग रहे. बता दें कि इन दोनों पार्टियों के राज्यसभा में कुल 19 सांसद हैं और इनके वॉकआउट करते ही विपक्ष की उम्मीदें धराशायी हो गई थीं. दूसरी तरफ बीजू जनता दल के राज्यसभा में सात सांसद हैं और इन्होंने तीन तलाक़ पर सरकार के पक्ष में मतदान किए.
राज्यसभा में भी बहुमत का समीकरण बदल रहा है : अभी राज्यसभा में कुल 241 सदस्य हैं और तीन तलाक़ पर हुए मतदान में 193 सांसद ही शामिल हुए. धीरे-धीरे एनडीए बहुमत के क़रीब पहुँच रहा है. बीजेपी ने हाल के महीनों में राज्यसभा में अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाई है. 241 सदस्यों वाली राज्यसभा में एनडीए के अब 112 सदस्य हो गए हैं. जबकि बहुमत के लिए 121 की संख्या होनी चाहिए. राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या 245 है लेकिन अभी चार सीटें ख़ाली हैं.
बीजेपी को बीजू जनता दल और टीआरएस से भी समर्थन मिलता रहा है.मतलब बड़ी संख्या में सांसदों ने इस बिल पर हुए मतदान से ख़ुद को अलग रखा. इसी वजह से सरकार को बिल पास करने में कोई परेशानी नहीं हुई. और तो और कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने अपने सांसदों के लिए ह्विप भी नहीं जारी किया था कि उनके लिए सदन में मौजूद रहना अनिवार्य है.
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