
अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 9वें दिन की सुनवाई आज होगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ में रामलला विराजमान की तरफ से आज बहस पूरी हो सकती है।
दरअसल, मंगलवार को रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कोर्ट में अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा था कि जहां मस्जिद बनाई गई थी उसके नीचे एक विशाल निर्माण था। ASI की खुदाई के दौरान जो चीजें मिली, उससे स्पष्ट है कि वह हिंदू मंदिर था।
सीएस वैधनाथन ने कहा था कि बाबरी मस्जिद के नीचे जिस तरह का स्ट्रक्चर था, उसकी बनावट, उसके निर्माण के तरीके और उसमे भगवान के चिन्ह बताते हैं कि वहां पहले से मंदिर था।
उन्होंने कहा कि पहले मुस्लिम पक्ष मंदिर के स्ट्रक्चर को ही मना करता था, लेकिन बाद में वो कहने लगे कि स्ट्रक्चर तो था, लेकिन वो एक इस्लामिक स्ट्रक्चर की तरह था।
ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, वैद्यनाथन ने कहा था कि मैंने कोर्ट के सामने पुराने सभी तथ्य और रिकॉर्ड पेश किए हैं। जिससे साबित होता है कि राम जन्मभूमि भगवान राम का जन्म स्थान है।
इस स्थान के प्रति लोगों की निष्ठा शुरू से चली आ रही है। मस्जिद गिरने के बाद एक पत्थर के स्लैब मिले जिनमें 12 या 13वीं शताब्दी में लिखे एक शिलालेख शामिल हैं।
शिलालेख थोड़ा क्षतिग्रस्त है और अंतिम दो पंक्तियां भारी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। शिलालेख का मूल पाठ संस्कृत में है। शिलालेखों पर उल्लेख साकेता मंडल में बने मंदिर से है और यह राम के जन्म का स्थान है।
रामलला के वकील ने कहा था कि संस्कृत वाले शिलालेख को विवादित ढांचा विध्वंस के समय पांचजन्य के एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था, इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है।
साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या संस्कृत वाले शिलालेख जैसी चीजों को एएसआई ने इकट्ठा किया गया था? रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा था कि ये एएसआई रिपोर्ट में नहीं था, क्योंकि एएसआई काफी बाद में आई थी।
वैद्यनाथन ने कहा था कि ASI रिपोर्ट का हवाला देते हुए मगरमच्छ, कछुओं का भी जिक्र किया और कहा था कि इनका मुस्लिम कल्चर से मतलब नहीं था।
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