काशी-महाकाल एक्सप्रेस: ‘कंफर्म’ नहीं हो पाई भगवान शिव की सीट! पेंट्रीकार में करना पड़ा सफर

काशी-महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन पूरी तरह से आम यात्रियों के लिए पटरी पर दौड़ पड़ी है। अपने पहले सफर पर ये ट्रेन गुरूवार को वाराणसी से उज्जैन के लिए रवाना हुई। इस ट्रेन के पहले सफर के दौरान भगवान शिव से जुड़ी एक नई तस्वीर भी सामने आई है। काशी-महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन में भगवान शिव के लिए छोड़ी गई सीट पर बवाल मचने के बाद अब रेलवे हरकत में आया है। हालांकि अभी भी भगवान शिव ट्रेन में ही मौजूद हैं, बस उन्हें रिजर्व सीट से पेंट्रीकार में शिफ्ट कर दिया गया है।

फोटो : सोशल मीडिया

ट्रेन के कमर्शियल रन के दौरान ट्रेन के स्टाफ ने पेंट्रीकार में पूजा-अर्चना की। आपको बता दें, काशी-महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हरी झंडी दिखाई थी। उस वक्त यह बात सामने आई थी कि काशी-महाकाल एक्सप्रेस की बोगी नंबर बी-5 में सीट नंबर 64 पर भगवान महाकाल (शिव) का मंदिर बनाया गया है। इसकी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया में खूब वायरल हुई थी।


सीट पर शिव का मंदिर बनाए जाने पर राजनीतिक बवाल भी मचा। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने धर्मनिरपेक्षता का हवाला देते हुए इस पर सवाल भी उठाया था। ओवैसी ने इस पर आपत्ति जताते हुए पीएमओ को टैग संविधान की प्रस्तावना की एक तस्वीर ट्वीट की थी। जैसे ही रेलवे के इस फैसले का विरोध होने लगा तो प्रशासन हरकत में आया। मामले में IRCTC ने सफाई देते हुए कहा था कि यह व्यवस्था केवल काशी-महाकाल एक्सप्रेस की उद्घाटन यात्रा के लिए ही था। रेलवे की यह परियोजना सफल हो इसके लिए भगवान शिव के लिए एक सीट आरक्षित की गई थी।लेकिन अब शिव मंदिर को पेंट्रीकार में शिफ्ट कर दिया गया है।

फोटो : सोशल मीडिया

आपको बता दें कि काशी-महाकाल एक्सप्रेस दो राज्यों के तीन ज्योतिर्लिंगों की यात्रा करेगा। यह ट्रेन इंदौर के निकट ओंकारेश्वर, उज्जैन में महाकालेश्वर और वाराणसी में काशी विश्वनाथ को जोड़ेगी। इसके अलावा इस ट्रेन में भक्ति भाव वाली हल्की ध्वनी से संगीत भी बजेगा और प्रत्येक कोच में दो निजी गार्ड होंगे। इतना ही नहीं इस ट्रेन में यात्रियों को शाकाहारी खाना परोसा जाएगा।

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