म्यांमार की सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को नागरिक के रूप में मान्यता क्यों नहीं देती है?

म्यांमार की सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को नागरिक के रूप में मान्यता क्यों नहीं देती है?

बंग्लादेश में अपनी मौजूदगी की दूसरी वर्षगांठ पर म्यांमार से विस्थापित हुए रोहिंग्या मुसलमानों ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन रविवार को बंग्लादेश के ऊखिया में स्थित कुटुपलोंग शरणार्थी कैंप में आयोजित हुआ।

संवाददाता के अनुसार, लगभग 2 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया और रोहिंग्या ज़िन्दाबाद के नारे लगाए। म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थियों के नेता मुहिब्बुल्लाह ने अपने देश म्यांमार लौटने की आशा जताते हुए कहा कि इस संबंध में रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षा के लिए म्यांमार सरकार गैरंटी दे।

पार्स टुडे डॉट कॉम पर छपी इस रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार की राष्ट्रीयता मिलना, जिन शहरों व गावों से विस्थापित हुए हैं वहां लौटना, प्रदर्शन में भाग लेने वालों की मांग थी। म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को इस देश के नागरिक के रूप में मान्यता नहीं देती, जबकि वे कई नस्लों से इस देश में रह रहे हैं।

25 अगस्त 2017 को म्यांमार की सेना और चरमपंथी बौद्धधर्मियों ने राख़ीन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों पर हमला किया था, जिसमें 6000 से ज़्यादा बेगुनाह मुसलमान मारे गए, 8000 घायल हुए और 10 लाख बंग्लादेश की ओर विस्थापित हुए।

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