
महाराष्ट्र में चुनाव अगर सबसे बड़ा उलटफेर माना जाए वो पंकज मुंडे की सीट रही। परली सीट से भाजपा की उम्मीदवार पंकजा मुंडे अपने चचेरे भाई और एनसीपी के धनंजय मुंडे से हार गईं। वह भाजपा के दिग्गज नेता रहे गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। वहीँ मुंडे ने मीडिया से बात करते हुए अपनी हार स्वीकार कर ली और कहा कि वह जनता के फैसले का सम्मान करती हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा में नेता विपक्ष धनंजय मुंडे ने अपनी बहन को लगभग 30000 वोटों से शिकस्त दे दी। धनंजय मुंडे को 121186 वोट मिले तो वहीं पंकजा मुंडे को मात्र 90418 वोट हासिल हुए। बता दें कि चुनाव प्रचार के दौरान पंकजा मुंडे के समर्थन में प्रचार करने के लिए न सिर्फ गृह मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आए थे बल्कि बीजेपी के फायरब्रांड नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परली में सभा संबोधित की थी।
पंकजा मुंडे ने गोपीनाथ मुंडे की विरासत के साथ-साथ इस इलाके में आर्टिकल 370, तीन तलाक और पाकिस्तान को भी बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। पंकजा मुंडे ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि महाराष्ट्र राष्ट्रीय मुद्दों और राष्ट्र से अलग नहीं है। ऐसे में राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव क्यों ना हो। लेकिन शायद परली विधानसभा के लोग स्थानीय मुद्दों को लेकर ज्यादा गंभीर थे।
स्थानीय स्तर पर पंकजा मुंडे के खिलाफ नाराजगी बहुत ज्यादा थी। परली के रहने वाले गुरु प्रसाद का कहना है कि गोपीनाथ मुंडे की वजह से दो बार पंकजा मुंडे को चुनाव में मौका दिया लेकिन उन्होंने क्षेत्र को अपना नहीं समझा. पंकजा मुंडे के पैतृक गांव की सड़क देखकर यकीन नहीं होता कि यह एक मंत्री का पैतृक गांव है।
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