तेलंगाना विधानसभा भी करेगी CAA के खिलाफ प्रस्ताव पारित, CM राव ने केंद्र से की कानून को वापस लेने की अपील

ेलंगाना सरकार ने मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही CM राव ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह इस कानून को वापस ले, जिससे लोगों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं हो.

खास बातें
  • तेलंगाना सरकार ने भी लिया सीएए विरोधी प्रस्ताव पास करने का निर्णय
  • इससे पहले केरल, पंजाब, राजस्थान और बंगाल कर चुके हैं पास
  • मुख्यमंत्री राव ने केंद्र से इस कानून को वापस लेने की मांग की है
हैदराबाद: तेलंगाना सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ विधानसभा में एक प्रस्ताव पास करने का निर्णय लिया है. इसके प्रस्ताव के पास होते ही तेलंगाना भी CAA विरोधी प्रस्ताव पास करने वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा. बता दें, तेलंगाना सरकार ने मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री राव ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह इस कानून को वापस ले, जिससे लोगों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं हो.

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी किए गए एक बयान में कहा गया, ‘राज्य मंत्रिमंडल केंद्र सरकार से अपील करता है कि वह पड़ोसी देशों के नागिरकों को नागरिकता देने के लिए धर्म के आधार पर भेदभाव न करे. इसके साथ ही यह भी अपील की गई है कि अगर नागरिकता देनी है तो उसमें सभी धर्मों के लोगों को शामिल किया जाए.’ एक अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री राव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट को लगता है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नागरिकता संबंधी यह कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है, जिससे यह संविधान में परिकल्पित धर्मनिरपेक्षता को खतरे में डाल देगा.

बयान में कहा गया, ‘कैबिनेट ने केंद्र सरकार से नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 को रद्द करने का अनुरोध किया है. इस कानून से दूसरे लोगों को नागरिकता देते समय धर्म के आधार पर भेदभाव होगा, जिससे संविधान में परिकल्पित धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ जाएगी.’ इसके साथ ही राज्य मंत्रिमंडल ने केरल, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल द्वारा पारित प्रस्ताव की तर्ज पर राज्य विधानसभा में CAA विरोधी प्रस्ताव पारित करने का फैसला किया है. इससे पहले मुख्यमंत्री राव ने CAA का विरोध करते हुए कहा था कि वह इसके खिलाफ क्षेत्रीय दलों के प्रमुखों और मुख्यमंत्रियों की बैठक बुला सकते हैं.

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