देश के विभिन्न हिस्सों में कई प्रगतिशील बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने की पुणे पुलिस की कार्रवाई बेहद निंदनीय है। दुनिया जानती है कि महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में 1 जनवरी 2018 को हजारों दलित पुरुषों और महिलाओं पर हिंसा की गई थी, जिसे कुछ हिंदुत्ववादीलोगों द्वारा योजनाबद्ध और दुष्ट तरीके से अंजाम दिया गया था। उनमें से एक मिलिंद एकबोटे को गिरफ्तार किया गया था और जमानत पर छोड़ भी दिया गया था, लेकिन कोरेगांव हिंसा का असली मास्टर माइंड, संभाजी भिड़े फरार बताया जाता है। हालाँकि वह खुलेआम घूमता है क्योंकि उसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस का बेशर्मी भरा और असंवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। संभाजी भिड़े अभी भी अंधविश्वासों का प्रचार करने में लगा है कि उसके द्वारा उगाए जाने वाले आम खाने से दंपत्ति को बेटा पैदा हो सकता है।

इस निंदनीय कार्रवाई के पहले भी पुलिस शांतिपूर्ण तरीकों से जनता का काम करने वाले बाबा आढव और मेधा पाटकर जैसे कई प्रगतिशील कार्यकर्ताओं को नक्सली या माओवादी बता कर गिरफ्तार करती रही है। देश भर में हजारों बुद्धिजीवी और कार्यकर्ता सक्रिय हैं जो आदिवासियों, दलितों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के समर्थक हैं, लेकिन वे नक्सली अथवा माओवादी नहीं हैं।

इधर महाराष्ट्र पुलिस (एटीएस) ने नाला सोपारा, जालना, औरंगाबाद आदि स्थानों पर कई हिंदुत्ववादीआतंकवादियों का भंडाफोड़ किया है। महाराष्ट्र सरकार, जिसे केंद्र की मोदी सरकार की शह है, इन बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भीम कोरेगांव की घटना के सात महीने बाद गिरफ्तार करके एक काउंटर पेश करने की कोशिश कर रही है ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके।

मैं, सोशलिस्ट पार्टी की ओर से, देवेंद्र फडनवीस से गिरफ्तार किये गए सभी बुद्धिजीवियों/कार्यकर्ताओं को रिहा करने और संभाजी भिड़े सहित कोरेगांव की हिंसा के वास्तविक अपराधियों को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाने का आग्रह करता हूं।

पन्नालाल सुराणा

वरिष्ठ नेता

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)


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