1971 की जंग के दौरान रेप पीड़ित महिला को उठाये उसके पति की तस्वीर का सच क्या है?

एक तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल है जिसमें एक व्यक्ति महिला को गोद में लिए हुए है. तस्वीर के साथ शेयर किए गए दावे के मुताबिक, ये स्वर्गीय कवि और लेखक डॉ. धर्मवीर भारती की क़िताब से ली गई है. दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीर 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की है. और जंग के हालातों में कई बार बलात्कार की शिकार बन चुकी महिला को उसके पति ने गोद में उठाया हुआ है. मेसेज ये दावा करते हुए ख़त्म होता है कि ये तस्वीर पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ हुए अत्याचार को दर्शाती है. असल मेसेज कुछ इस प्रकार है – “ये तस्वीर डॉ धर्मवीर भारती जी की पुस्तक से ली गयी हैं, ये 1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध का है, जहाँ पति अपनी पत्नी की (लगातार बलात्कार की गयी)अस्मत बचा ना सका, लाश हो चुकी पत्नी को लेकर कहां जाये? यही तो पूरा पाकिस्तान 1947 से और 1971 के बाद से बांग्लादेश में हिन्दुओं”

ये ध्यान देने लायक है कि इस तस्वीर को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के चलते शेयर किया जा रहा है. ये कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के गैर-मुस्लिम प्रवासी लोगों को नागरिकता देता है.

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ट्विटर यूज़र @ChaanchalMaurya ने इस तस्वीर को शेयर किया है. (ट्वीट का आर्काइव लिंक) इस ट्वीट को करीब 5,000 बार रीट्वीट किया जा चुका है.

इसी तरह, कई फ़ेसबुक और ट्विटर यूज़र्स ने ये तस्वीर इसी दावे के साथ शेयर की है.

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फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने इस तस्वीर को रशियन सर्च इंजन यांडेक्स पर रिवर्स सर्च किया जिससे यूट्यूब पर अपलोड किया गया एक वीडियो मिला. इस वीडियो में वायरल तस्वीर को देखा जा सकता है. इसे यूट्यूब पर अक्टूबर 2014 में ग्रेसी रोसाडो ने अपलोड किया था. वीडियो के मुताबिक इस तस्वीर को फ़ोटोग्राफर मार्क एडवर्ड्स ने खींचा था.

की-वर्ड्स सर्च करने पर ऑल्ट न्यूज़ ने वायरल तस्वीर को हार्ड रेन प्रोजेक्ट की वेबसाइट पर पाया. इस वेबसाइट को एडवर्ड्स ने एक चैरिटी के लिए शुरू किया था. इस तस्वीर को फ़ोटोग्राफर ने खुद खींचा था. तस्वीर को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “1971 में बांग्लादेश युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान से आते हुए शरणार्थी।”

जॉन टेलर की किताब ‘Body Horror: Photojournalism, Catastrophe and War’ में भी इस तस्वीर का श्रेय एडवर्ड्स को दिया गया है.

अगस्त 2014 में वेबसाइट रेयर हिस्टोरिकल फ़ोटोज़ (RHP) से बात करते हुए एडवर्ड्स ने कहा, “मैंने गम्भीर हालत को दर्शाती इस तस्वीर को 1971 के बांग्लादेश युद्ध के दौरान खींचा था, जिसमें पति अपनी हैजा से पीड़ित पत्नी को उठाकर ले जाते हुए दिखाई दे रहा है. क़रीब 10 लाख लोगों ने बांग्लादेश की सीमा पार कर युद्ध के ख़राब हालातों से बचने के लिए भारत में प्रवेश किया था.”

कुछ ऑनलाइन सोर्सेज़ के मुताबिक़, 1971 में बांग्लादेश में हैजा की महामारी फैली थी.

ऑल्ट न्यूज़ ने अधिक जानकारी के एडवर्ड्स को ईमेल के ज़रिये संपर्क किया. उन्होंने बताया, “मुझे नहीं पता कि उनकी हैजा से मौत हुई थी या नहीं लेकिन ये स्पष्ट है कि उनका बलात्कार नहीं हुआ था.”

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इससे ये स्पष्ट है कि इस तस्वीर को ग़लत दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है और ये नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों के बीच और इस कानून को सही ठहराने के लिए शेयर की जा रही है.

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